परिचय
भारत में पिछले कुछ वर्षों में बिजली क्षेत्र में तेजी से सुधार हुआ है। पहले देश बिजली की कमी से जूझ रहा था, लेकिन अब स्थिति काफी बेहतर हो चुकी है। सरकार के लगातार प्रयासों के कारण भारत आज बिजली की कमी वाले देश से बिजली पर्याप्त देश बन गया है।
बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि
वर्ष 2014 में भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 2.48 लाख मेगावाट थी। इसके बाद लगातार नई परियोजनाओं और निवेश के कारण इसमें तेजी से वृद्धि हुई।
जून 2024 तक यह क्षमता बढ़कर लगभग 4.46 लाख मेगावाट हो गई है। इसका मतलब है कि पिछले दस वर्षों में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार
बिजली उत्पादन के साथ साथ उसे सही जगह तक पहुंचाना भी जरूरी होता है। इस दिशा में भी बड़ा काम किया गया है। पूरे देश को एक ग्रिड से जोड़ा गया है, जिससे अब एक राज्य से दूसरे राज्य तक आसानी से बिजली भेजी जा सकती है।
पिछले वर्षों में लाखों किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन जोड़ी गई हैं, जिससे बिजली सप्लाई अधिक मजबूत और स्थिर बनी है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुधार
बिजली की उपलब्धता में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सुधार हुआ है। वर्ष 2015 में गांवों में औसतन लगभग 12.5 घंटे बिजली मिलती थी।
अब यह बढ़कर लगभग 21.9 घंटे तक पहुंच गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता लगभग पूरे दिन यानी 23 घंटे से अधिक हो गई है।
सरकारी योजनाओं की भूमिका
सरकार ने गांवों और घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कई योजनाएं चलाईं। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत हजारों गांवों का विद्युतीकरण किया गया।
सौभाग्य योजना के माध्यम से लगभग 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन दिया गया। इसके अलावा अब आरडीएसएस योजना के तहत बचे हुए घरों तक बिजली पहुंचाने का काम जारी है।
बिजली की मांग और आपूर्ति में संतुलन
पहले देश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच काफी अंतर था। वर्ष 2013-14 में यह अंतर लगभग 4 प्रतिशत से अधिक था।
अब यह घटकर लगभग शून्य के करीब पहुंच गया है। इससे यह साफ होता है कि देश में बिजली की स्थिति काफी मजबूत हुई है।
निष्कर्ष
2014 के बाद भारत के बिजली क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। उत्पादन, वितरण और आपूर्ति सभी क्षेत्रों में सुधार हुआ है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की जरूरत है, लेकिन सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु
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- 2014 में उत्पादन क्षमता 2.48 लाख मेगावाट
- 2024 में बढ़कर 4.46 लाख मेगावाट
- लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि
- ग्रामीण बिजली आपूर्ति 12.5 घंटे से बढ़कर 21.9 घंटे
- शहरी क्षेत्रों में 23 घंटे से अधिक बिजली
- 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन
- पूरे देश को एक ग्रिड से जोड़ा गया
- बिजली की कमी लगभग समाप्त
स्रोत
यह जानकारी भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो pib द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है, जो संसद में प्रस्तुत किए गए थे।
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