आज के समय में जहां अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं, वहीं कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का साहस रखते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है पूनम घिंडियाल जी की, जिन्होंने अपने प्रयासों से एक साधारण सरकारी स्कूल को नई पहचान दिलाई।
निजी क्षेत्र से शिक्षा क्षेत्र तक का सफर
पूनम घिंडियाल जी ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई में प्राइवेट सेक्टर की नौकरी से की थी। वहां काम करने के बाद उन्होंने समाज के लिए कुछ अलग करने का निर्णय लिया और शिक्षा के क्षेत्र को चुना। उनका यह निर्णय केवल एक नौकरी बदलने का नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का था।
2016 में शुरू हुआ परिवर्तन
जब उन्होंने वर्ष 2016 में स्कूल जॉइन किया, तब वहां केवल 9 बच्चे ही पढ़ते थे। स्कूल की स्थिति सामान्य थी और लोगों का विश्वास सरकारी स्कूलों पर कम हो चुका था।
लेकिन आज, उनके अथक प्रयासों के कारण उसी स्कूल में लगभग 68 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह बदलाव अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
तानों को बनाया प्रेरणा
जब पूनम जी ने स्कूल में काम शुरू किया, तब उन्हें समाज के लोगों से कई तरह की बातें सुनने को मिलीं। लोग अक्सर कहते थे कि “सरकारी शिक्षक केवल मुफ्त की तनख्वाह लेते हैं और काम नहीं करते”।
यह बात उन्हें बहुत चुभी। लेकिन उन्होंने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इन्हें अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने ठान लिया कि वे अपने काम से इस सोच को बदलेंगी।
अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की शुरुआत
वर्ष 2016 से ही उन्होंने अपने स्वयं के प्रयासों से स्कूल में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की। यह कदम बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि आज के समय में अभिभावक अंग्रेजी शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
उनके इस प्रयास से धीरे धीरे लोगों की सोच बदलने लगी। जो अभिभावक पहले अपने बच्चों को निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भेजते थे, उन्होंने अब सरकारी स्कूल पर भरोसा जताना शुरू किया।
विश्वास और गुणवत्ता का निर्माण
पूनम घिंडियाल जी ने न केवल पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाया, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया। उन्होंने स्कूल के वातावरण को ऐसा बनाया कि बच्चे और अभिभावक दोनों ही संतुष्ट रहें।
यही कारण है कि आज उनका स्कूल एक उदाहरण बन चुका है, जहां शिक्षा के साथ साथ विश्वास भी बढ़ा है।
सरकार से अपेक्षा
पूनम घिंडियाल जी के प्रयासों का परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह ऐसे समर्पित शिक्षकों को प्रोत्साहित करे।
यदि सरकार पूनम जी जैसे शिक्षकों को पहचान और समर्थन देती है, तो निश्चित रूप से प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
पूनम घिंडियाल जी की कहानी यह साबित करती है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी व्यवस्था को बदला जा सकता है। उन्होंने यह दिखा दिया कि सरकारी स्कूल भी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दे सकते हैं, बस जरूरत है सही दिशा और समर्पण की।
ऐसे शिक्षक न केवल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनते हैं।



