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भालू और गश्ती टीम के बीच भिड़ंत, वन दरोगा के साहस से बचीं दो जिंदगियां

उत्तराखंड में भालू हमले के दौरान वन दरोगा अजयपाल पंवार की बहादुरी
उत्तराखंड में भालू हमले के दौरान वन दरोगा अजयपाल पंवार की बहादुरी

थौलधार ब्लॉक के सुल्याधार क्षेत्र में भालू और गश्ती टीम के बीच करीब 10 मिनट तक जोरदार संघर्ष हुआ। इस दौरान वन दरोगा अजयपाल पंवार के साहस और सूझबूझ से दो लोगों की जान बच गई।

भालू की सूचना मिलने पर वन दरोगा अजयपाल पंवार, बेरगणी गांव के प्रधान युद्धवीर सिंह, ग्रामीण विनोद रावत और वन बीट अधिकारी प्रवीन रावत मौके पर पहुंचे। उनके साथ 10-12 ग्रामीण भी मौजूद थे।

जैसे ही अजयपाल पंवार और विनोद रावत खाले की ओर बढ़े, अचानक झाड़ियों से निकले भालू ने ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह के पैर को अपने जबड़ों में जकड़ लिया। किसी तरह वह खुद को छुड़ाकर भागे, लेकिन तभी भालू ने विनोद रावत पर हमला कर दिया। सिर पर वार होने से वह जमीन पर गिर पड़े और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

इस गंभीर स्थिति में वन दरोगा अजयपाल पंवार ने अपनी जान की परवाह किए बिना बहादुरी दिखाते हुए बरछा भालू के मुंह में घुसा दिया और लगातार डंडे से वार करते रहे। उनके इस साहसिक कदम से भालू विचलित हो गया और जंगल की ओर भाग गया।

इस संघर्ष में विनोद रावत घायल हो गए, जबकि वन दरोगा अजयपाल पंवार की कमर में चोट आई है।

स्थानीय निवासी अतर सिंह तोमर और जिला पंचायत सदस्य शीशपाल सिंह राणा का कहना है कि यदि उस समय वन दरोगा पंवार ने हिम्मत नहीं दिखाई होती, तो यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

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